Mercykutty Amma criticises Ayesha Potti, alleging greed for positions and betrayal, sparking fresh debate in Kerala politics.
आयशा पोट्टी पर मर्सीकुट्टी अम्मा का तीखा हमला
“पद की लालसा ने किया विश्वासघात”, केरल की राजनीति में बढ़ा तनाव
तिरुवनंतपुरम | सच बोलो न्यूज़
केरल की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। वरिष्ठ वामपंथी नेता और पूर्व मंत्री Mercykutty Amma ने पार्टी की ही नेता Ayesha Potti पर तीखा हमला बोला है। मर्सीकुट्टी अम्मा ने आरोप लगाया कि आयशा पोट्टी ने पद और राजनीतिक महत्वाकांक्षा की लालसा में पार्टी के साथ विश्वासघात किया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब केरल में वाम दलों के भीतर आंतरिक मतभेदों की चर्चा पहले से ही जोरों पर है। मर्सीकुट्टी अम्मा के इस बयान ने पार्टी के अंदर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक बहस को और हवा दे दी है।
“लालच ने तोड़ा भरोसा”
मीडिया से बातचीत में मर्सीकुट्टी अम्मा ने कहा कि पार्टी ने आयशा पोट्टी को कई मौके दिए, लेकिन उन्होंने संगठनात्मक अनुशासन और सामूहिक निर्णयों को प्राथमिकता नहीं दी।
उनके शब्दों में,
“जब कोई नेता केवल पद और व्यक्तिगत फायदे के बारे में सोचने लगता है, तो वह विचारधारा और संगठन—दोनों को नुकसान पहुंचाता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि वाम राजनीति त्याग, अनुशासन और सामूहिक सोच पर आधारित है, न कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं पर।
पार्टी के भीतर असंतोष?
मर्सीकुट्टी अम्मा के इस बयान को सिर्फ एक व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पार्टी के भीतर पनप रहे असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केरल की वाम राजनीति में पीढ़ीगत और नेतृत्वगत टकराव को भी उजागर करता है।
हाल के वर्षों में CPI(M) के भीतर कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए हैं—चाहे वह टिकट वितरण हो, नेतृत्व की भूमिका हो या संगठनात्मक फैसले।
आयशा पोट्टी की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस पूरे विवाद पर आयशा पोट्टी की ओर से तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि उनके समर्थकों का कहना है कि यह आरोप एकतरफा हैं और सच्चाई सामने आनी चाहिए।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि आने वाले दिनों में इस बयानबाज़ी पर पार्टी नेतृत्व को हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।
केरल राजनीति पर असर?
इस तरह के सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप से वाम दलों की एकजुटता की छवि को झटका लग सकता है। विपक्ष पहले ही इन बयानों को लेकर वाम मोर्चे पर निशाना साध रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आंतरिक मतभेद सार्वजनिक मंचों पर इसी तरह सामने आते रहे, तो इसका असर आगामी राजनीतिक रणनीतियों और चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।
निष्कर्ष

मर्सीकुट्टी अम्मा का बयान सिर्फ एक नेता की आलोचना नहीं, बल्कि केरल की वाम राजनीति के भीतर चल रही गहरी अंतर्कलह की ओर इशारा करता है।
सच बोलो न्यूज़ के लिए असली सवाल यही है—
👉 क्या पार्टी नेतृत्व इस विवाद को समय रहते सुलझा पाएगा?
👉 या फिर यह मतभेद केरल की राजनीति में और बड़ी दरार का कारण बनेंगे?
आने वाले दिनों में आयशा पोट्टी की प्रतिक्रिया और पार्टी की आधिकारिक स्थिति इस राजनीतिक विवाद की दिशा तय करेगी।